आखरी खत कारगिल से,



मां बस अभी अभी वक्त मिला है ये खत लिखने का, वैसे तो अभी सबके सब खत लिखने में व्यस्त हैं अपने घर वालों को, कमांडर साहब का जो हुकुम है, जो शायद उनको भी पता है जहां हम अब जाने वाले हैं, वहां से हम में से कुछ वापिस नहीं आएंगे। शायद ये मेरा भी आखरी खत हो, बोलते हुए कितना अजीब-सा लगता है,आखरी खत। मां पता है यहाँ सबको मालूम है कि शायद हम वापिस लौटकर ना आए, पर जो कोई भी खत लिख रहा है वो किसी ना किसी अपने को याद करके, मुस्कुरा के खत लिख रहा है, हम सैनिक भी कितने अजीब होते हैं। यही समझेंगे लोग, कि देखो आखरी खत लिख रहा है और मुस्कराए जा रहा है। चेहरे पर कोई शिकन नहीं है, कोई घबराहट नहीं है।


हम सैनिक कितना बदल जाते हैं हर एक परिस्थिति में ढल जाते हैं। माँ हवा तेज और सर्दी भी बहुत है, पर शायद हमारे हौसले और हिम्मत देख के भी इन तूफानों के सीने ठंडे पड़ गए हैं।  मैं आज भी याद करता हूं जब तुम मेरी आंखो के सामने नहीं होती थी, तो कैसे मैं चिल्ला चिल्ला के तुम्हें पुकारता था आखिर कहाँ चली गई, मेरी आंखे बस तुमको ही ढूंढ़ती थी। पर परसो जब दूसरी पलटन के कुछ जवानों की लाशें देखी, मुझे अपनी खुद की मां का चेहरा ही भूल गया था, बस उन मांओं के चेहरे मेरी आंखो के सामने आ रहे थे जिन्होंने अपने लाल को खो दिया। बस मां वहीं आग मैं अपने सीने में लिए बैठा हूं, मुझे अब अपने आप की परवाह बिल्कुल भी नहीं रही, ना घर की याद, ना किसी का प्यार। बस मुझे उस बर्फीली चोटी पे तिरंगा लहराना है, जिसके लिए मेरे साथियों के अपनी जान तक न्यौछावर कर दी, मां आज मुझे अपनी बहन नहीं, उन सभी बहनों के रोते चेहरे मेरी आंखो के सामने घूम रहे हैं जिनकी राखी को कभी भी अपने भाई की कलाई नहीं मिलेगी। ये सोच-सोच के मेरा मन रो उठता हैं। कि कैसे उन मेहंदी वाले हाथों ने ना चाहते हुए भी मंगलसूत्र उतारा होगा, हाथों की चूड़ियांँ तोड़ी होंगी। कैसे एक बूढ़े बाप ने अपने जवान बेटे को कंधा दिया होगा।


मां मै बहुत बेचैन हूँ। और हां मुझे ही नहीं, मेरे सारे साथियों को भी बहुत बेचैनी है, की कैसे हमारी ही जमीन पे आ के कोई इसी जमीन के बेटों को मारे। मां हमको बदला लेना है अपनी जमीन वापिस लेनी है इसी की तो कसम खाई थी हमने, कैसी भी परिस्थिति हो हम पीछे नहीं हटेंगे हर कुर्बानी देके अपनी भारत मां की रक्षा करेंगे।


मां मुझे नहीं मालूम मै खुद चलके आऊंगा या चार कंधो पे, पर मां मै अपनी कसम निभा के ही आऊंगा। शायद तेरा कर्ज इस जनम में चुका नहीं पाऊं, क्योंकि मेरा फ़र्ज़ मुझे बुला रहा है मां। अपना ख्याल रखना, जब याद आये तो माँ इसे देख लेना लेकिन माँ तू आंसू ना बहाना, अपने लाल पर गर्व करना और ये आखरी खत संभाल के रखना।


© Gurinder Singh